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About the book: "अलफ़ाज़ यह ऐसी किताब हैं जो दर्शाती हैं प्यार , गम , ज़िन्दगी और ख़ुशी ." ज़िन्दगी वो लोकल की तरह हैं कभी तेज़ तो कभी स्लो हैं . चलनी मगर उसे हर रोज़ हैं . मन मैं हज़ार आशाएं लिए हर रोज़ तुझे दौड़ना हैं ,इस भीड़ भाड़ मैं शायद तू खुद को भूल गया हैं. कभी वक़्त मिले तो एक किताब का कागज़ लेना , दिल के हर राज़ उसमे खेद कर लेना . सुकून की नींद अब तुझे आणि हैं, सालो से दबे हुए अलफ़ाज़ अब बहार आने को हैं . अब वो लोकल की विंडो की सीट के पास जब भी बैठेगा तू , उस हवा के रुख मैं कुछ नशा सा होगा , होटों पे तेरे मुस्कान होगी अब कोई खालीपन सा ना होगा . कुछ ऐसा जादू "अलफ़ाज़ " कर जाएगी . About The Author: Ms. Pooja Madame is from the city that never sleeps “Mumbai”. She had done her Post Graduation in Financial Markets (MBA), with this she believes that feelings that can’t be expressed can be put down in words to give that feeling a life to live. She has been a part of few Anthologies before but this would be her first Debut Book. On the other side she is also the Founder of “House of Talent’s”Open Mic. She further quotes that “the loudest and clear message that you can give is always through writings, so follow your passion because you never know what it has in store for you”.
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About the book: भारत; एक रहस्यमय, एवं शोभमान राष्ट्र । परन्तु वह क्या है, जो इस राष्ट्र को चमत्कारी बनाता है? यह उन प्रार्थमिक सभ्यताओं में से एक है जिसने अनेक अन्य सभ्यताओं को जन्म दिया। इसने विश्व को आयुर्वेद, योग, ज्योतिष तथा खगोल विज्ञान दिया है। मनुस्मृति, वेद, उपनिषद, पुराण, एवं अनेकों महान ग्रंथों के साथ हिंदू धर्म को एक जटिल धर्म माना जाता है। इन शास्त्रों की विस्तृत व्याख्या का विदेशियों तथा हमारे द्वारा भ्रात विवेचन किया गया । युवा पीढी को कब तक अज्ञानता के अंधकार में रखा जाये? वैदिक काल में हिंदू धर्म के मूल सिद्धांत क्या है? गौत्र परम्परा तथा २४ अवतार क्या हैं? च्यवन एवं ध्रुव कौन थे? इस भूमि के विषय में आकर्षक करने वाले समस्त प्रश्नों का उत्तर "भारतवर्ष" है । इसमें शक्तिपीठों, ज्योतिर्लिंगों, के साथ-साथ वह काल खण्ड जब इस महान भूमि को "आर्यावर्त के रूप में जाना जाता था, तथा "विवेकानंद" जैसे आधुनिक काल के महापुरुषों का विवरण है। संक्षेप में, यह शब्दों में अंकित भारतवर्ष है
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प्रज्ञा तिवारी ने डूब कर प्रेम कहानी लिखी है। हीर, जीत और पंचम के बीच चलती हुई कहानी जीवन और संबंधों के सारे छोर खोजती है। युवा प्रेमियों का अलबेला मन मिजाज मनभावन है। युवा प्रेमी भी अपनी खुशियाँ एक दूसरे में ढूँढते हैं। अपनी मस्ती और आवारगी के लिए साथी पर निर्भर होते हुए भी अपने लिए स्पेस की माँग रख देते हैं। उपन्यास का अंत भी गैर पारंपरिक है। अगले भाग का लालच देकर कुछ छुपा लिया है। यह फिल्मी तरीका है... दूसरी फिल्म का संकेत देकर 'द इंड होता है। अंग्रेजी शब्दों की, गानों और मैसेज की भरमार है। अब युवा पीढ़ी अपनी ही भाषा में बात करेंगी न! बहुत रोचक कथा है, बहुत प्रवाह भी है। एक जिज्ञासा के साथ पढ़ते चले जाते हैं। बकौल अनामिका 'जीवंत किरदारों और हंसमुख संवादों के बीच पनपती इस खिचड़ी भाषा में कहीं कंकड़ नहीं है। सहज प्रवाही संवादों में कोई कोई अंग्रेजी शब्द दांत में फंसकर खिचडी का मजा किरकिरा नहीं करता।" प्रज्ञा का पहला उपन्यास है। पहले मैंने इनकी कहानियाँ पढी हैं। मुझे कहानी संग्रह का इंतजार रहा और इधर इस लड़की ने उपन्यास लिख दिया। बहुआयामी प्रतिभा संपन्न प्रज्ञा बहुत कुछ करती है... जो भी करती है, रचनात्मक करती है। उसे पहले उपन्यास की बधाई और ढेर सारी शुभकामना
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इस किताब को मेने अपने अब तक के अनुभवों से लिखा है । जो देखा जो सीखा वो आज आप सब के सामने एक किताब के जरिए प्रस्तुत कर रहा हूँ । लोग क्या कहेंगे एक ऐसा शब्द है । जिसका हम सभी लोग अपने जीवन काल मे सामना करते है । इतने सारे लोग लगातार इसी बात में फंसे हुए हैं । कि लोग क्या कहेंगे अगर उन्होंने एक निश्चित तरीके से काम किया, हम युवा पीढ़ी किसी भी नए काम को करने से डरते है । मैं ऐसा करूँ या वो करूँ तो लोग क्या कहेंगे...? अगर मैं उससे प्यार करता/करती हूँ तो लोग क्या कहेंगे...? अगर मैं उसे डेट करूं तो लोग क्या कहेंगे...? अगर मैं इस कोर्स को पढ़ूंगा तो लोग क्या कहेंगे...? मैं उससे बात करूँ तो लोग क्या कहेंगे...? खाली दिल रो दूं तो लोग क्या कहेंगे...? अगर मैं इस तरह से कपड़े पहनूंगा तो लोग क्या कहेंगे? लेकिन अंदाज़ा लगाओ कि क्या हम सच में लोगो के लिए जी रहे है । जब हम जीवित रहने के लिए लोगों की राय नहीं पूछते हैं, फिर हम क्यों अपने नए काम को करने से पहले उनके सवालो के बारे में सोचते है। जब आप इसे कुछ गंभीर विचार देते हैं, तो आप महसूस करेंगे कि आप लोगों के लिए नहीं जी रहे हैं, इसलिए, मैं कहूंगा, लोगों के लिए अभिनय करना बंद करो। आगे बढ़ो और प्यार करो, चलो, बात करो, यात्रा करो, नृत्य करो और इस बारे में चिंता किए बिना खुश रहो कि दूसरे क्या सोचेंगे। यह पुस्तक आपको यह बताएगी कि दूसरे आपके बारे में क्या सोचेंगे, इस पर ध्यान दिए बिना स्वतंत्र रूप से अपना जीवन कैसे जिएं। हमेशा याद रखें कि ज्यादातर बार "जिन्हें बुरा लगता है, वे मायने नहीं रखते और जो मायने रखते हैं, वे बुरा नहीं मानते"।
About the Author
इनकी उम्र मात्र 19 वर्ष है । यह पिलखुवा , उत्तरप्रदेश के निवासी है । इतनी कम उम्र में ही इन्होंने हिन्दी सहित्य में अपने कदम जमाना शुरू कर दिया है, जिसके रहते इन्हें बहुत-सी उपलब्धियों से सम्मानित किया जा चुका है। यह एक लेखक, कवि एवं ब्लॉगर है। इनके लेखक बनने की कहानी आज से करीब चार साल पहले शुरू हुई थी । इन्होंने काफी किताबों में सहलेखक के रूप में लिखा है । और हिन्दी मे ब्लोग्स भी लिखते है । तुषार अक्सर मैगज़ीन एवं न्यूज़पेपर के लिए आर्टिकल भी लिखते रहते है । यह एक नेशनल एंड इंटरनेशनल रिकॉर्ड होल्डर भी है । इन्हें इंस्पिरेशनल इंडियन अवार्ड एवं बेस्ट एचीवर ऑफ द ईयर इन लिटरेचर 2020 से भी नवाजा गया है । -
About the Book
यह विषय एक माँ और गोद लिए हुए बेटे की जिंदगी पर आधारित है। एक पढ़ी लिखी कमाऊ औरत को संबिधानिक अधिकार है कि वो एक बच्चे को गोद ले सकती है। मग़र उसी औरत ने अगर शादी से पहले यही निर्णय ले लिया तो हमारे ज़माने में क़यामत आ जाती है। मग़र दुनियाँ की परवाह ना करते हुए उसी औरत ने बच्चे को अपनाया वह भी अपनी शादी से दूर होकर। और किस तरह से उसने परेशानियाँ झेलकर बच्चे को बड़ा किया यही इस कहानी की विशषता है। दुनियाँ के लिए एक आईना है और प्रेरणा भी है।About the author:
कवयित्री मंजुलता मोहपात्रा २५ सालोँ से साहित्य के क्षेत्र में विभिन्न विषयों में लिखती आ रही हैं। उनकी लिखी गयी लगभग ८ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। अंग्रेजी, मराठी तथा ओड़िआ भाषा में भी वो लिखती हैं। हाल ही में इनके द्वारा लिखी गयी एक कहानी पुस्तक “वह कौन थी” का वर्ल्ड्वाइड प्रकाशन तथा वितरण हो चुका है। झंकार इनकी पहली कविता लेखन की किताब है। -
About The Book
किताबें हमारे जीवन की सबसे अच्छी साथी होती हैं। जब भी हमें उनकी आव- श्यकता होती है वे हमारे लिए उपलब्ध होती है। किताबें हमारी आसपास की दुनिया को समझने, सही और गलत के बीच निर्णय लेने में हमारी मदद करती हैं। वे हमारे आदर्श, मार्गदर्शक या सर्वकालिक शिक्षक के रूप में भी हमारे जीवन में शामिल होती हैं। इस किताब में अनेक विषय पर मैंने कविता लिखी है। जिसमें इजहारे मोहब्बत, टूटा हुआ दिल, मोटीवेशनल और कई तरह के कविताओं का मिश्रण है। मुझे उम्मीद है इस से आप सब को और मुझे भी इस किताब से कुछ सिखने का मौका मिलेगा। -
पुस्तक परिचय
'मुझे पुकारती हुई पुकार’ ४० कविताओं का एक ऐसा संग्रह है जो जीवन, अस्तित्व और मानवीय स्थिति का अन्वेषण बहुत ही गहनता से करता है। यह पुस्तक चार भागों में विभाजित: पहला भाग, आत्म-परिचय और पहचान स्थापित करने पर केंद्रित है, दूसरा आंतरिक द्वंद्व और आत्मचिंतन को समर्पित है, तीसरा समाज की आलोचना और व्यापक चिंतन पर, और चौथा भाग स्वीकार्यता, समाधान और आशा के स्वर को दर्शाता है। यह पुस्तक समकालीन हिंदी कविता की शैली में नवाचार का प्रयास करती है। इसमें नैतिकता, एकाकीपन और अर्थकी खोज पर आधारित कविताएँ शामिल हैं, साथ ही कुछ कविताएँ प्रकृति और उसके साथ हमारे संबंध को भी उजागर करती हैं। यह पुस्तक जीवन के शोर में कुछ क्षणों का शांत चिंतन प्रदान करती है।लेखक परिचय
25 वर्षीय सुशांत सौरभ, बिहार के एक छोटे से शहर बाँका के रहने वाले हैं। IISER भोपाल से उन्होंने भौतिकी में बीएस की पढ़ाई की है और वर्तमान में IISc में इंटर्निशप कर रहे हैं। बहुत ही कम उम्र से उन्हें उपन्यास, कहानियाँ, और कविताएँ पढ़ने का शौक रहा है। वे अक्सर किताबें छुपाकर घर में और कक्षा में पढ़ा करते थे। उन्हें विशेष रूप से दार्शनिक साहित्य और काव्य में गहरी रुचि है। हाल ही में वे अपने जीवन के कुछ सवालों के जवाब ढूँढने हिमाचल प्रदेश के एक गाँव, नड्डी में कुछ समय रहे। अपने अस्तित्व, उद्देश्य और जीवन के मायने जैसे प्रश्नों में उलझे हुए सुशांत, इनके उत्तरों की खोज में हैं और दास्तोयेवस्की, काफ्का, कामू, और मुक्तिबोध जैसे लेखकों से प्रेरित हो, पढ़ने और लिखने को अपने जीवन का अिभन्न हिस्सा बनाए रखना चाहते हैं। -
स्नेहा श्रुति को काव्य और उपन्यासों में रुचि है, एवं उनको लोगों को जानने की इच्छा, उनको और उनके व्यवहार को समझने की जिज्ञासा रहती है। ये संग्रह उन सब के लिए है जो अपने जीवन में एक उम्मीद, एक रोशनी, एक राहत की तलाश में है। कवयित्री इस ३० काव्य के संग्रह के द्वारा अपना नज़रिया, अपनी कहानी कहना चाहती है।
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About The Book
Embark on an extraordinary journey with Mahendra Agarwal as he retraces the sacred path of Lord Ram, from Ayodhya to Rameshwaram, accompanied by his devoted wife. In this captivating book, Agarwal intimately covers the 14-year exile of Ram, Lakshman, and Sita, exploring the profound historical and religious significance of each location. With vivid photos and insightful narratives, this book is a pilgrimage through time, revealing the spiritual essence of the places, encounters with significant individuals, and the enduring teachings of the epic Ramayana. Join the author on a pilgrimage of devotion, history, and self-discovery. -
About The Book
अयोध्या से रामेश्वरम तक, भगवान राम द्वारा अनुसरित पवित्र मार्ग की एकै असाधारण यात्रा पर महेंद्र अग्रवाल और उनकी धर्मपत्नी के साथ चलें। इस मनोरम पुस्तक में, अग्रवाल जी ने गहन ऐतिहासिक और धार्मिक खोज करते हुए, राम, लक्ष्मण और सीता के 14 साल के वनवास को विस्तारपूर्वक दर्शाया है। प्रत्येक स्थान का महत्व. सुंदर तस्वीरों और अंतर्दृष्टिपूर्ण व्याख्यानों के साथ, यह पुस्तक एक तीर्थयात्रा है, जो स्थानों के आध्यात्मिक सार, महत्वपूर्ण व्यक्तियों के साथ भेंट और महाकाव्य रामायण की स्थायी शिक्षाओं को प्रकट करती है। भक्ति, इतिहास और आत्म- खोज की इस तीर्थयात्रा पर लेखक के साथ चलें













