About the Book
“पढ़ा हुआ या कढ़ा हुआ”
अर्थ :-
पहला पढ़ा हुआ
वो जिसने ज्ञान को पढ़-पढ़कर पाया है,
और दूसरा कढ़ा हुआ,
जिसने जो भी सीखा है, वह जीवन से सीखा है।
तो विकास जी, वो दूसरी तरह के व्यक्ति हैं
“कढ़े हुए” जिन्होंने जो भी सीखा, ज़िंदगी से सीखा।
जन्म 1986 दिल्ली में हुआ। पढ़ाई-लिखाई भी वहीं, दिल्ली में हुई, पर बड़ी ही अरुचि से पूरी की।
क्योंकि उन्हें किताबों को नहीं, लोगों को पढ़ना पसंद था।
और पढ़ते-पढ़ते सफ़र शुरू हुआ लिखने का।
कच्चे रजिस्टर से डायरी,
डायरी से कुछ दोस्तों तक,
वहाँ से वीडियो,
वीडियो से कविताओं के बड़े-बड़े मंच,
और फिर वहाँ से सीधे अभी आपके हाथों में।
सामान्य तौर पर कोई लेखक जब कुछ लिखता है, तो पहले ही अपने बचाव में कह देता है कि-
“इस किताब का किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति,या किसी घटना से कोई लेना-देना नहीं है।”
जबकि इसके ठीक उलट, “भरी हुई ख़ाली जगह” के लेखक का कहना है कि
इस किताब की एक-एक कविता
किसी न किसी का, और कई बार स्वयं उनका, जीवन है।
अब हो सकता है,
इसे पढ़ते-पढ़ते
आपको उन ज़िंदगियों में से
कोई एक ज़िंदगी अपनी मिले।







Reviews
There are no reviews yet.