About The Book
पेश है ‘द पिग्गी बैंक स्टोरी’…या हमारे आपके घरों में रखे किसी गुल्लक की कहानी। यह ईशान, मेहर और उनके प्यारे बुद्धिमान दादाजी (दादू) की नज़रों से एक ऐसी यात्रा है जो आपको हँसाएगी, सिखाएगी और भावुक भी करेगी।
यह महज़ पन्नों का पुलिंदा नहीं…..यह आज की पीढ़ी के लिए अनिवार्य, क्रांतिकारी शैक्षिक आंदोलन है!
हास्य, समझदारी और वास्तविक जीवन की दुविधाओं से भरे 20 दिल को छू लेने वाले अध्यायों के माध्यम से, यह किताब पैसे की बात को न केवल समझने लायक, बल्कि अविस्मरणीय बना देती है।
यह हर दूरदर्शी माता-पिता, शिक्षक और छात्र के लिए एक अनमोल विरासत है।
किताब आपको बताती है कि पैसा सिर्फ़ मासिक खर्चों का हिसाब नहीं, बल्कि स्वतंत्रता का द्वार है। आप सीखेंगे कि इसकी असली ताकत को पहचानना कैसे है, इसके सामाजिक दबाव को चुनौती कैसे देनी है, और सबसे महत्वपूर्ण…..पैसे को अपना गुलाम बनाकर कैसे जीना है, न कि उसकी गुलामी करके।
अगर आपने कभी यह चाहा है कि आपका बच्चा अपने मूल्यों को खोए बिना पैसे की समझ सीख ले, तो यह किताब ही आपका जवाब है।
क्योंकि जो सबक स्कूल सिखाना भूल जाते हैं…
ज़िंदगी उसकी कीमत ब्याज सहित वसूलती है।







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