• About The Book
    संगीत हमें जोड़ता है, अलग-अलग वाद्ययंत्रों को मिलाकर ऐसी धुन बनाता है जो सभी के लिए खुशी लाती है। ये किताब हर उस व्यक्ति के मार्गदर्शन के लिए है जो अपने सपनों को साकार करने के लिए जीतोड़ मेहनत कर रहा है। डरना बुरा नही है मगर हमें डर को अपने सपनों के रास्ते में नही आने देना चाहिए, ये किताब इस बात को दर्शाती है। इसमे बताई गई कुछ सच्ची और सांझी लगने वाली कहानियां हर किसी को अपना सपना पूरा करने का हौसला और प्रोत्साहन देती है। इस किताब का सार बहुत प्रत्यक्ष है- अपने ऊपर विश्वास रखो, कठिनाइयों का डटकर के सामना करें, महनत पूरे दिल से करें, और सफर का आनंद लो।
    About The Author
    नमस्ते, मैं दिशा शर्मा, जयपुर, राजस्थान की रहने वाली हूँ। मैंने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई पूरी कर ली है और वर्तमान में उसी क्षेत्र में मास्टर डिग्री कर रही हूँ । संगीत के प्रति मेरा जुनून मेरी 10वीं बोर्ड परीक्षा के बाद उभरा, और तभी से यह मेरे जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। मैं गिटार, यूकेलेले और कीबोर्ड बजाने में कुशल हूँ। इसके अतिरिक्त, मैंने संगीत में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, और वर्तमान में अपने कौशल को और अधिक निखारने और अपने संगीत ज्ञान को और गहन करने के लिए इसी क्षेत्र में अपनी मास्टर डिग्री कर रही हूँ। अपनी संगीत यात्रा में मुझे जयपुर के संगीत आश्रम में अनेकों बार प्रदर्शन करने का सौभाग्य मिला है। मेरी उल्लेखनीय उपलब्धियों में ऑल इंडिया रेडियो (ए.आई.आर.) पर एक साक्षात्कार सम्मिलित है। प्रदर्शन के अतिरिक्त, मुझे सिखाने और अपने संगीत ज्ञान को साझा करने का शौक है। विभिन्न मंचों और माध्यमों पर मैं कक्षाएँ आयोजित करती हूँ जहाँ छात्रों को मेरे द्वारा की गई गलतियों से बचने के लिए मार्गदर्शन करती हूँ और उन्हें उनके जुनून को बढ़ाने के लिये प्रोत्साहित करती हूँ। संगीत मेरे लिए केवल एक रुचि नहीं है; यह जीवन जीने का एक ढंग है और मैं दूसरों को उनकी संगीत कला एवं सपनों के प्रति प्रेरित करने का प्रयास करती हूँ।
  • कैंसर केवल एक शारीरिक बीमारी नहीं है; इसका मानसिक और भावनात्मक प्रभाव भी उतना ही गहरा होता है। यह पुस्तक कैंसर यात्रा के अनदेखे पहलुओं को उजागर करती है, जो अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। यह किताब न केवल उन लोगों के लिए सहायक है जो इस कठिन दौर से गुजर रहे हैं, बल्कि उनके लिए भी जो अपने प्रियजनों की देखभाल कर रहे हैं। इसमें आशा, साहस और सहानुभूति का संदेश है, ताकि कोई भी अकेला महसूस न करे। यह पुस्तक चिंता और भय से निपटने में मदद करती है और दिखाती है कि सबसे कठिन समय में भी उम्मीद की किरण मौजूद होती है। यह एक मार्गदर्शिका है, जो कैंसर से जूझ रहे लोगों को समझ, समर्थन और शक्ति प्रदान करने का प्रयास करती है।  
    लेखक के बारे में
      शिल्पी एक अनुभवी लर्निंग और डेवलपमेंट स्पेशलिस्ट हैं, जिनके पास बीस से अधिक वर्षों का अनुभव है। वह प्रोफेशनल्स को उनके करियर को ऊंचाई देने और उनकी क्षमताओं को निखारने में मदद करने के लिए समर्पित रही हैं। अपने करियर के दौरान, उन्होंने जुनून के साथ ऐसे ट्रेनिंग प्रोग्राम बनाए हैं जो विकास को प्रोत्साहित करते हैं और संभावनाओं के द्वार खोलते हैं, जिससे लोग अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकें। अप्रैल 2024 में, शिल्पी के जीवन ने एक अप्रत्याशित मोड़ लिया जब उन्हें ब्रेस्ट कैंसर का पता चला। इस कठिन समय में, उन्होंने एक गहरी व्यक्तिगत निर्णय लिया—एक ऐसी किताब लिखने का, जो कैंसर मरीजों को यह एहसास दिलाए कि उनकी भावनाओं को सुना, समझा और स्वीकार किया गया है। अपनी लेखनी के माध्यम से, वह न केवल सांत्वना देना चाहती हैं बल्कि दूसरों को प्रेरित भी करना चाहती हैं, ताकि वे अपने सफर को हिम्मत और आशा के साथ तय कर सकें। शिल्पी को पढ़ने का बेहद शौक है, और उन्होंने हमेशा लर्निंग और डेवलपमेंट प्रोफेशनल के रूप में अपनी विशेषज्ञता को बढ़ाने के लिए किताबों का सहारा लिया है, खासकर नॉन-फिक्शन में उनकी गहरी रुचि रही है। हालांकि, उनका सच्चा साहित्यिक लगाव थ्रिलर और फैंटेसी फिक्शन की दुनिया में है, जहां उन्हें न केवल रोमांच बल्कि प्रेरणा भी मिलती है।
  • पुस्तक के बारे में

    कमर दर्द पर लिखी अधिकांश योग पुस्तकों में केवल आसनों की जानकारी दी जाती है। यह पुस्तक उससे आगे बढ़कर बताती है कि आपकी पीठ में दर्द क्यों होता है और क्यों वही आसन, जो एक व्यक्ति के लिए लाभकारी है, दूसरे के लिए नुकसानदायक हो सकता है। आधुनिक Pain Neuroscience (दर्द विज्ञान) और पारंपरिक योग दर्शन के समन्वय के माध्यम से यह पुस्तक समझाती है कि दर्द हमेशा किसी क्षति का संकेत नहीं होता, मस्तिष्क दर्द के पैटर्न को दोबारा सीखकर उससे मुक्त हो सकता है, और रीढ़ केवल शरीर का ढांचा ही नहीं, बल्कि स्थिरता और संतुलन का आधार भी है। इस पुस्तक में आठ विशेष रीढ़ संबंधी स्थितियों के लिए चरणबद्ध योग प्रोटोकॉल, चिकित्सकीय तर्क पर आधारित 50 योगासन, तथा ऐसी श्वास-प्रणालियाँ (प्राणायाम) शामिल हैं जो तंत्रिका तंत्र को शांत कर राहत प्रदान करती हैं।वैज्ञानिक दृष्टिकोण, योगिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव पर आधारित यह पुस्तक वास्तविक और दीर्घकालिक राहत की दिशा में एक भरोसेमंद मार्गदर्शिका है।

    लेखक परिचय

    डॉ. भवित बंसल (BNYS, एम.एससी. योग थेरेपी) योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में चिकित्सक-शोधकर्ता हैं। उन्होंने एस-व्यासा विश्वविद्यालय से BNYS और निम्हांस (NIMHANS) से योग थेरेपी में एम.एससी. की है। वे वर्तमान में आईआईटी दिल्ली में पीएच.डी. शोधार्थी तथा आयुष मंत्रालय के अंतर्गत CCRYN में सीनियर रिसर्च फेलो हैं। उनके 20 से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। डॉ. सुषमा यादव उज्जैन की समर्पित योग शिक्षिका एवं सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वे पतंजलि महिला जिला प्रभारी और आई.एन.ओ. जिला सचिव के रूप में योग, स्वास्थ्य एवं महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्यरत हैं। वे रघुप्रेम सेवा फाउंडेशन की संस्थापक भी हैं, जिसके माध्यम से समाज सेवा और जनकल्याण के कार्यों को आगे बढ़ा रही हैं।  
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