“देश के गध्धारो का दम निकालकर उनको दोष से दूर कर जाता है कैलाश पर्वत की तरह अडिग रहकर कैलाशविजयवर्गीय तभी कहलाता है” इस पुस्तक में ऐसी कविताएं अंकित है जो समाज में कल्याण शांति और मिट जाएं भ्रान्ति, ऐसे शब्दों से कविताओं को प्रस्तुत किया गया है। कविता मूल रूप में हृदय की अंतरंग यात्रा कराती है सभी घटनाओं को साक्षी मानकर समाज में उत्थान और पतन की घटनाओं को शब्दों द्वारा अंकित किया जाता है। माननीय कैलाश विजयवर्गीय द्वारा किये गए समाज कल्याण और सोच को काव्य रूप में प्रस्तुत किया है। आशा है आगे भी उनके प्रयासों से समाज प्रगति की तरफ बढ़ेगा
कैलाश से कैलाश तक Kailash Vijayvargiya Kailash Se Kailash Tak
Additional information
| ISBN | 978-9361856709 |
|---|---|
| Pages | 62 pages |
| First Published | 10 June 2024 |






Reviews
There are no reviews yet.